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शिकारी को सबक

शिकारी को सबक


Spread the loveएक शिकारी ने बहुत से जानवरों का शिकार किया था खासतौर पर वह खरगोशों का शिकार अक्सर किया करता था वह खरगोश को पकड़ता बड़े से चाकू से उनको मारता और भूनकर खा जाता था यह सत्य है कि हर पापी के पापों का घड़ा एक दिन अवश्य ही भरता है एक बार की बात है कि उस शिकारी ने जंगल से एक खरगोश पकड़ा और अपने गांव की ओर चल दिया उसने खरगोश को कानों से पकड़ रखा था रास्ते में एक पेड़ के नीचे एक मुनी बैठा था उसे खरगोश की दुर्दशा पर दया आ गई


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September 20, 2020
मूर्ख बिल्लियां

मूर्ख बिल्लियां


Spread the loveसड़क पर एक रोटी पड़ी हुई थी तभी एक बिल्ली की नजर उस रोटी पर पड़ी लेकिन जब तक वह उस रोटी के निकट पहुँचती कि तभी एक दूसरी बिल्ली ने उस पर झपट्टा मारा और अपने कब्जे में कर लिया दोनों बिल्लियां आपस में झगड़ पड़ी दोनों ही उस रोटी पर अपना – अपना हक जताने लगी काफी देर तक लड़ने झगड़ने के बाद एक बिल्ली ने सुझाव देते हुए कहा हम इस रोटी को आधी – आधी बांट लेती हैं मैं इस के दो टुकड़े कर देती हूं एक तुम ले लेना और एक मैं तुम


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September 19, 2020
गाय का मालिक कौन ?

गाय का मालिक कौन ?


Spread the loveएक किसान था उसका नाम धर्मपाल था उसके पास एक दुधारू गाय थी जो सुबह – शाम दूध देती थी धर्मपाल उस गाय का दूध बेचकर काफी धनी हो गया था एक बार गाय बीमार पड़ गई और उसने दूध देना छोड़ दिया धर्मपाल ने सोचा कि गाय अब स्वस्थ तो हो नहीं सकती इसलिए वह उसे जंगल में छोड़ आया, लेकिन गाय अपने स्वभाववश धर्मपाल के पास वापस लौट आई उसने पुनः लाठी मार – मार कर उसे भगा दिया  गाय भटकती हुई पड़ोस के गांव में एक अन्य किसान माधव के खेत में जाकर बेहोश हो


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September 19, 2020
चोर-चोर मौसेरे भाई

चोर – चोर मौसेरे भाई


Spread the loveद्धापर नगर में द्रोण नामक एक गरीब ब्राह्मण रहता था ब्राह्मण को जिस दिन भिक्षा अच्छी मिल जाती उस दिन उसका सारा परिवार भरपेट भोजन करता और जब भिक्षा नहीं मिलती तब पूरे परिवार को भूखे पेट सोना पड़ता उसने या उसके परिजनों ने जीवन में ना कभी अच्छे वस्त्र पहने थे और ना कभी बढ़िया भोजन ही किया था निर्धनता के कारण वहां मैला कुचैला ही रहता था उसके सर और दाढ़ी के बाल ही नहीं बल्कि हाथ पांव के नाखून भी बढे रहते थे ब्राह्मण की इस दशा पर तरस खाकर एक यजमान ने उसे  दो


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September 13, 2020
राजा और साधु

राजा और साधु


Spread the loveएक राजा था उसे अपनी प्रशंसा सुनने का बड़ा शौक था एक बार उसने एक भव्य और मजबूत महल का निर्माण करवाया सभी ने उस महल की खूब प्रशंसा की प्रशंसा सुनकर राजा बड़ा प्रसन्न हुआ एक बार की बात है कि राजा के उस महल में एक महात्मा पधारे राजा ने महात्मा की खूब सेवा – टहल की सेवा – टहल करने के बाद राजा ने उन्हें अपना पूरा महल दिखाया लेकिन महात्मा ने महल के विषय में कोई टिप्पणी नहीं की जबकि राजा चाहता था कि महात्मा उसके महल के बारे में कुछ बोले महल की


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September 12, 2020
गधे का बंधन

गधे का बंधन


Spread the loveएक  कुम्हार के पास कई गधे थे रोज सुबह जब वह गधों को मिट्टी लाने के लिए ले जाता तब एक जगह कुछ देर के लिए आराम करता था वह सभी गधों को पेड़ से बांध देता और खुद भी एक पेड़ के नीचे लेट कर सुस्ताने लगता था एक दिन की बात है कि जब वह मिट्टी लेने जा रहा था तब गधों को बांधने वाली रस्सी छोटी पड़ गई विश्राम स्थल पर उसने सभी गधे बांध दिए लेकिन एक गधा बंधने से रह गया वह उसका कान पकड़ कर बैठ गया अब ना कुम्हार आराम कर


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September 11, 2020
अनोखा अतिथि सत्कार

अनोखा अतिथि सत्कार


Spread the loveबहुत समय पहले की बात है कि एक घने वन में क्रूर बहेलिया अपने शिकार की खोज में इधर-उधर भटक रहा था सुबह से शाम तक भटकने के बाद एक कबूतरी जैसे – तैसे उसके हाथ लग गई कुछ क्षणों बाद तेज वर्षा होने लगी सर्दी से कांपता हुआ बहेलिया वर्षा से बचने के लिए एक वृक्ष के नीचे आकर बैठ गया कुछ देर बाद वर्षा थम गई उसी वृक्ष की शाखा पर बैठा कबूतर अपनी कबूतरी के वापस लौटकर ना आने से दुखी होकर विलाप कर रहा था पति के विलाप को सुनकर उसे वृक्ष के नीचे


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September 10, 2020
जादुई पतीले का रहस्य

जादुई पतीले का रहस्य


Spread the loveएक किसान को अपने खेत में खुदाई के दौरान एक बहुत बड़ा पतीला मिला वह पतीला इतना बड़ा था कि उसमें एक साथ  पांच सौ लोगों के लिए चावल पकाए जा सकते थे किसान के लिए वह पतीला बेकार था उसने वह पतीला एक तरफ रख दिया और पुनः खुदाई करने में जुट गया कुछ देर बाद किसान आराम करने के लिए बैठ गया उसने अपना फावड़ा उस पतीले में डाल दिया और आराम करने लगा आराम करने के बाद जब उसने पतीले में से फावड़ा निकालना चाहा तो उसमें से एक – एक करके सौ फावड़े निकले


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September 10, 2020
सुपारी का चमत्कार विक्रम और बेताल

सुपारी का चमत्कार


Spread the loveविक्रम तो हटी था ही उसने इस बार भी बेताल को पकड़कर अपने वश में कर लिया बेताल ने नई कहानी सुनानी आरंभ की…. प्राचीन काल में कुसुमावती नगर पर सुविचार नामक राजा राज करता था राजा की एक पुत्री थी चंद्रप्रभा वह बहुत सुंदर थी अक्सर शाम को वह अपनी सखियों के साथ बाग में सैर करने जाया करती थी एक दिन जब चंद्रप्रभा बाग में सैर कर रही थी तब वहां उसकी भेट एक ब्राह्मण युवक मनस्वी से हुई मनस्वी भी उसी नगर में रहने वाले एक ब्राह्मण चंद्रदेव का पुत्र था रूप रंग तथा गुण


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September 9, 2020
असफल तपस्या विक्रम और बेताल

असफल तपस्या विक्रम और बेताल


Spread the loveविक्रम ने भी ठान रखी थी कि वह बेताल को साधु के पास ले जाकर ही दम लेगा अतः उसने इस बार भी बेताल को वश में किया और कंधे पर लाद कर चल दिया इस बार बेताल ने यह कहानी सुनाई….. उज्जैन नगरी में वासुदेव नामक एक ब्राह्मण रहता था उसका एक पुत्र था गुणाकर  वासुदेव ने अपने पुत्र को पढ़ा लिखा कर योग्य शास्त्री बना दिया था किंतु गुणाकर को यह सब रास ना आया क्योंकि दुव्यसनो ने उसे चारों ओर से घेर रखा था वासुदेव ने अपने पुत्र को सही राह पर लाने का बहुत


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September 6, 2020

साधु और चूहा

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मध्यप्रदेश नामक शहर में शिवजी का एक मंदिर  था एक साधु उस मंदिर में रहता था वह शहर में जाकर भिक्षा मांग कर लाता और अपने परिवार का पेट पालता था प्रतिदिन जब वह खाना खा चुकता तब बचा हुआ खाना अपने भिक्षा पात्र में डालकर खूंटी पर लटका देता था फिर वह सोने चला जाता और सुबह वह बचा हुआ खाना सफाई करने वाले कर्मचारी को दे देता जो कि मंदिर का  बरामदा साफ करता था जहां वह सोता था 

कुछ चूहे उस मंदिर में रहते थे वे उससे बहुत नाराज थे कि क्यों साधु अपना सारा खाना ऊपर टांग देता है वह इतनी ऊपर छलांग नहीं लगा सकते थे 

चूहों ने अपने मुखिया से बात की जो कि बहुत चालाक और फुर्तीला था सब चूहों ने जाकर उससे कहा तुम कूदने में इतने कुशल हो कि तुम आसानी से साधु के भिक्षा पात्र तक पहुंच सकते हो फिर हमें दूसरी जगह खाना ढूंढने के लिए जाने की क्या आवश्यकता है जो खाना हमारे इतने पास है उसे हम तुम्हारी मदद से आसानी से खा सकते हैं

चूहे के मुखिया को यह बात  बहुत अच्छी लगी उसने साधु के भिक्षा पात्र पर छलांग लगाने की कोशिश करने का वादा किया फिर कुछ और चूहों की सहायता से वह उसके पास रेंगता हुआ पहुंच गया फिर अपने फुर्तीला शरीर से कूदता हुआ भिक्षा पात्र के बिल्कुल निकट पहुंच गया और उस पात्र को नीचे की ओर लुढ़का दिया ताकि अन्य दोस्त जो नीचे खड़े थे उन्हें भी खाने को मिल जाए फिर वह और उसके साथी हंसी खुशी अपने अपने बिल में वापस चले गए यह सिलसिला कई दिनों तक चलता रहा

साधु को पता चल गया था कि उसका खाना कोई रोज चुरा  कर ले जाता है तब उसने अपने पात्र को और ऊंचा टांग दिया परंतु चूहों का मुखिया बहुत ऊपर तक कूदने वाला था इसलिए साधु को उस पर बहुत गुस्सा आया उसने चूहे की शरारत को रोकने की तरकीब बनाई जब वह अपने बिस्तर पर सोने जाता तो बांस की एक लंबी छड़ी से पात्र को हिलाता रहता ताकि चूहा डर कर भाग जाए जब भी चूहा उसके पात्र के पास आता तो वह जोर से छड़ी को हिलाने लगता और चूहा डर कर भाग जाता पर जैसे ही वह सोने की कोशिश करता चूहा फिर आ जाता इस प्रकार चूहे और साधु की सारी रात भागा दौड़ी मैं बीत जाती

एक बार एक अन्य साधु जो कि तीर्थ करने जा रहा था उस साधु से मिलने आया साधु ने उसका बहुत स्वागत किया और उससे अच्छा अच्छा भोजन करवाया सोने जाने से पूर्व सन्यासी और साधु धर्म पर विचार करने के लिए बैठे परंतु साधु सारा समय चूहे के बारे में सोचता रहा इसलिए उसने सन्यासी की बातों को ध्यान से नहीं सुना वह छड़ी से अपना पात्र हिलाता रहा और सन्यासी को गलत उत्तर देता रहा

आखिरकार सन्यासी ने साधु से गुस्से में कहा तुम मेरे सच्चे दोस्त नहीं हो मैं जो भी तुम्हें सुना रहा हूं तुम ध्यान से नहीं सुन रहे हो और मुझे गलत जवाब दे रहे हो मेरे ख्याल से तुम इस मंदिर को पाकर घमंडी हो गए हो और अपनी पुरानी दोस्ती को भूल गए हो 

मैं ऐसा व्यवहार बर्दाश्त नहीं कर सकता मैं इसी क्षण यहां से जा रहा हूं

साधु सन्यासी की बातें सुनकर बड़ा गमगीन हो गया उसने कहा मित्र ऐसे मत रूठो तुम मेरे सबसे प्यारे मित्र हो यह सही है कि मैंने पिछले कुछ समय से तुम्हारी बातें ध्यान से नहीं सुन रहा था परंतु यह सब तुमसे नाराजगी की वजह से नहीं है मैं तुमको इसका सही कारण बताता हूं प्रतिदिन मैं अपना बचा हुआ भोजन इस पात्र में डाल कर ऊपर लटका देता हूं परंतु एक बदमाश चूहा ऊपर जाकर सारा भोजन खा लेता है और बचा हुआ अपने साथियों के लिए नीचे गिरा देता है इसलिए मैं छड़ी से पात्र हिलाता रहता हूं मैं चूहे को डराना चाहता हूं क्योंकि खाना ना मिलने से काम करने वाले सफाई करना नहीं चाहते इस बदमाशों ने मुझे परेशान कर रखा है एक बिल्ली या बंदर भी इतना ऊपर नहीं कूद सकता जितना कि यह चूहा

 सन्यासी ने पूछा तुम चूहे के रहने का स्थान जानते हो

 साधु ने कहा मैं नहीं जानता

सन्यासी ने कहा मेरे ख्याल से जहां भी यह चूहा रहता है वहां पर उसने बहुत सारा खाना जमा कर लिया है तभी इस चूहे में अपने भंडार को देखकर ऊपर कूदने की शक्ति आ गई है तुम्हें इसके रहने के स्थान का पता नहीं है

 नहीं मित्र ! साधु ने उत्तर दिया

 क्या तुम्हारे पास पकड़ने के लिए कोई छड़ है

 हां मेरे पास लोहे की शक्तिशाली छड़ है

चलो अच्छा है कल सुबह ही हम दोनों इस चूहे  का पीछा करेंगे और इसके बिल को खोदकर सारा खाना निकाल देंगे

चूहों के मुखिया ने जब यह सुना तो वह परेशान हो गया उसने सोचा अब तो मैं खत्म हो गया यह सन्यासी अवश्य ही मेरे खाने के खजाने का स्थान खोज लेगा इसलिए मुझे अपना रास्ता बदल लेना चाहिए उस रात चूहा अपने साथियों के साथ लंबे टेढ़े – मेढ़े रास्ते से घर जाने लगा पर तभी एक बिल्ली उन सभी चूहों के सामने आ गई और चूहों पर झपट पड़ी उसने कुछ चूहों को मार दिया और कुछ को जख्मी कर दिया जो चूहे बचे वह भागकर अपने बिल में छुप गए वह सब बहुत डरे हुए थे चूहे के मुखिया मंदिर के दूसरे कोने में भाग गया

थोड़ी देर पश्चात साधु और सन्यासी दोनों खून की धारा के पीछे – पीछे चूहों के मुखिया के बिल तक पहुंच गए उन्हें जल्दी ही खाने का खजाना मिल गया

जो कि चूहों के मुखिया ने इतने दिनों से जमा कर रखा था सन्यासी बहुत खुश हुआ और बोला यही वह खजाना है जिसने बड़े चूहे को इतना ऊपर कूदने की शक्ति दी है चलो हम यह सारा खाना ले चलते हैं और देखते हैं कि अब क्या होता है जब चूहों का मुखिया अपने बिल में पहुंचा तो वहां कुछ ना पाकर वह बहुत निराश हुआ उसने सारी रात दुखी होकर बिताई अगली सुबह वह फिर मंदिर में जा पहुंचा उसके सारे साथी ने उसे घेर लिया जब साधु ने चूहों के इधर उधर भागने का शोर सुना तो वह फिर छड़ी से अपना पात्र बजाने लगा

 सन्यासी ने कहा मेरे प्यारे मित्र अब तुम आराम से सो जाओ साधु ने उत्तर दिया मैं कैसे सो सकता हूं जबकि बदमाश चूहा अपने साथियों सहित फिर यहां आ पहुंचा है इसलिए मैं छड़ी हिला रहा हूं सन्यासी ने मुस्कुराते हुए उत्तर दिया अब वह चूहा इतना ऊपर नहीं कूद पाएगा क्योंकि उसका बल खाने के खजाने में था और वह सारा खाना हम ले आए हैं

चूहा यह सब बातें सुनकर बहुत डर गया अब मैं उन्हें ऊपर कूद कर दिखा दूंगा कि मैं ऊपर कूद सकता हूं या नहीं यह सोचकर वह पात्र की और लपका पर वह उसके पास ना पहुंच कर जमीन पर धम से गिरा जब सन्यासी ने चूहे को जमीन पर दर्द से कराहते हुए देखा तो वह बहुत खुश हुआ उसने साधु से कहा देखो – देखो यह चूहा कितना अजीब और बेबस लग रहा है अभी यह भी अपने साथियों जैसा ही बन गया है अब तुम आराम से सो जाओ अभी इस चूहे की कूदने की ताकत हमारे हाथ में है

 फिर साधु ने अपना बचा हुआ खाना एक थैले में डालकर उसका तकिया बना लिया और उस पर सो गया  चूहे के साथी को पता चल गया कि उनका बहादुर नेता अब पहले जैसा नहीं रहा वह चुपचाप अपने बिल में जाकर घुस गया उसके सारे साथी उसे छोड़ कर चले गए और उन्होंने दूसरा नेता चुन लिया चूहों के मुखिया ने एक अंतिम प्रयास किया वह साधु के सिर के नीचे लगे तकिया मैं से खाना चुराने के लिए गया पर साधु जाग गया और उसने चूहे को अपनी लाठी से मारा चूहे को लाठी नहीं लगी पर वह समझ गया कि अब साधु को छकाना बेकार है

यह जगह अब रहने के काबिल नहीं है मैं अपने लिए दूसरा स्थान खोज लेता हूं जहां मैं आराम से रह सकूं यह सोचकर वह चूहा जल्दी से मंदिर से भाग गया और साधु ने उसे फिर कभी वहां नहीं देखा साधु ने उस सन्यासी की बुद्धिमता को धन्यवाद दिया जिसने उसे सिखाया था शत्रु की शक्ति को खत्म करने के लिए उसकी शक्ति के स्रोत पर वार करो


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