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dadi maa ki kahani

53 Dadi ma ki Khani


Spread the loveहेलो साथिओ स्वागत है आपका बचपन में हम सबने अपनी दादी नानी माँ से कहानियाँ तो सुनी ही होगी पर आज के दौर में dadi ma ki kahani जैसे लुप्त ही हो गयी है टेक्नोलॉजी के चलते आज के बचो के पास दादी से कहानियाँ सुनने का मौका ही नहीं लगता इसलिए हम आपके बच्चो के लिए लेके आये है 53 dadi ma ki kahani आशा करते है की आपको ये पसंद आएगी दादी माँ की कहानियो में जादू होता था तो चलिए आपको ले चलते हैु उसी पुराने दौर में जहा दादी अपने पौतो – पोती को


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August 5, 2020
दो दोस्त और बोल्नेवाला पेड

दो दोस्त और बोलनेवाला पेड


Spread the loveएक गांव में धर्मबुद्धि और पापबुद्धि नामक दो मित्र रहते थे धर्मबुद्धि बुद्धिमान और होशियार था पर उसका मित्र पापबुद्धि बुद्धि से कमजोर और धीमा काम करने वाला था पापबुद्धि गरीब था गरीबी में रहते – रहते वह तंग आ चुका था उसने सोचा यदि मैं अपने मित्र धर्मबुद्धि की सहायता लूं और उसके साथ किसी दूसरे शहर में जाकर धन कमाऊ तो अच्छा रहेगा बाद में मैं उसके हिस्से का धन चुरा लूंगा और फिर सारी जिंदगी आराम से रहूंगा थोड़े दिन पश्चात पापबुद्धि धर्मबुद्धि के पास गया और बोला तुमने अपनी वृद्धावस्था के लिए क्या सोचा


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August 3, 2020
शेर और चलाक गीदड़

शेर और चलाक गीदड़


Spread the loveएक बार घने जंगल में वज्रदंतसुर नामक  एक शेर रहता था उसके दो साथी थे एक चतुरका  नमक गीदड़ और दूसरा करवयामुख  नामक भेड़िया एक दिन व्यापारियों का एक दल ऊंटों पर सवार होकर उधर से निकला उनके साथ एक ऊंटनी थी जिसके बच्चे होने वाला था उससे चला नहीं जा रहा था इसलिए व्यापारियों का दल उसे वही जंगल में छोड़ कर आगे चला गया भूखे शेर ने तुरंत उसे मार डाला और मजे से उसका मांस खाने लगा साथ में उसके साथी भी मांस खाने लगे  लेकिन जब उन्होंने उसका पेट खोला तो उसमें एक छोटा


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August 3, 2020
धोखेबाज सुनार

धोखेबाज सुनार


Spread the loveपहले समय में किसी गांव में यज्ञदत्त नाम का एक गरीब ब्राह्मण रहता था वह बहुत सज्जन और दयालु व्यक्ति था किंतु उसकी पत्नी बहुत ही कटुभाषणी थी वह हर समय ब्राह्मण को कोसती और ताने मारती रहती थी इससे तंग आकर एक दिन यज्ञदत्त घर से निकल गया उसने निश्चय कर लिया कि अब वह धन कमाकर ही घर वापस लौटेगा यज्ञदत्त नगर की ओर चल दिया रास्ते में एक घना जंगल  पड़ता था जंगल से गुजरता हुआ यज्ञदत्त आगे ही आगे बढ़ता गया अब वह अपने गांव से काफी दूर निकल आया था उसने सोचा कि


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August 3, 2020
बंदर और मगरमच्छ 

बंदर और मगरमच्छ 


Spread the loveबहुत पहले की बात है किसी नदी के किनारे एक सेब के पेड़ पर एक बंदर रहता था वह रोज मीठे  – मीठे सेब तोड़ कर खाता रहता था एक दिन नदी में रहने वाले मगरमच्छ ने उसे सेब खाते हुए देखा तो उसका भी जी ललचा गया वह धीरे-धीरे चलकर बंदर के पास पहुंचा और बड़े ही मीठे शब्दों में बंदर से बोला बंदर भैया क्या तुम मुझे कुछ सेब दे सकते हो मुझे बहुत भूख लगी है बंदर ने तुरंत कुछ मीठे सेब तोड़ कर उसके लिए नीचे गिरा दिए मगरमच्छ ने बड़े स्वाद से उनको


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August 2, 2020
एक  ठग और सन्यासी 

एक  ठग और सन्यासी 


Spread the loveएक बार एक देवशर्मा नामक सन्यासी गांव से दूर एकांत स्थान पर किसी मंदिर में रहता था बहुत से लोग दूर-दराज से उसका आशीर्वाद पाने के लिए आते रहते थे वे उसे बहुत सुंदर वस्त्र भेंट स्वरूप दे जाते सन्यासी उन सब को बेच देता था इस प्रकार वह बहुत अमीर बन गया वह किसी का विश्वास नहीं करता था उसने सारा पैसा एक चमड़े के थैले में डाल रखा था जिसे वह हर समय अपनी बगल में दबाए रखता एक क्षण के लिए भी वह थैले को अपने से अलग ना करता अश्वभूति नामक एक चोर को


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August 2, 2020
 कौवे और उल्लू के बीच दुश्मनी

 कौवे और उल्लू के बीच दुश्मनी


Spread the loveएक बार दुनिया के सारे पक्षी इकठा हुए वे एक महत्वपूर्ण मंत्रणा करना चाहते थे तोता बत्तख कोयल उल्लू और बगुले और भी तरह – तरह के पक्षी इकठा हुए पक्षियों ने कहा गरुण हमारा राजा है पर वह सारा समय विष्णु भगवान की सेवा में लगा रहता है और हमारे लिए कुछ भी नहीं करता ऐसे राजा का क्या लाभ वह शिकारियों के बिछाए जाल से कभी हमारी रक्षा नहीं करता इसलिए हमें नए राजा का चुनाव समझदारी से करना चाहिए सब पक्षी अपनी नजर चारों ओर घुमा कर देखने लगे कि राजा किसे बनाए जाए उन्हें


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August 2, 2020
उल्लू और हंस

बुरे की संगत कभी ना करो


Spread the loveकिसी घने जंगल में एक बहुत बड़ा सरोवर था उस सरोवर में एक हंस रहता था जो बड़े आनंद के साथ अपना जीवन व्यतीत कर रहा था एक दिन कहीं से घूमता – घुमाता एक उल्लू वहां आ पहुंचा उसने पहले तो सरोवर से जल पिया  फिर अपनी दृष्टि इधर-उधर घुमाई उसे वह स्थान बहुत रमणीक लगा इसलिए उल्लू ने निश्चय किया कि अब वह इसी स्थान पर रहेगा उल्लू को वहां देख कर हंस उसके पास पहुंचा और बोला देख क्या रहे हो उल्लू भाई इस समय तो यह स्थान बहुत सुहाना दिख रहा है लेकिन गर्मी


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August 2, 2020
गीदड़ की चतुराई

गीदड़ की चतुराई


Spread the loveकिसी जंगल में महाचतुर नाम का एक गीदड़ रहता था एक दिन जब वह जंगल में अपने आहार की खोज में भटक रहा था तो उसने मरा हुआ एक हाथी देखा गीदड़ ने हाथी की लाश के चारों ओर घूमकर उसका निरीक्षण किया किंतु हाथी के शरीर में उसे कहीं भी ऐसा मुलायम स्थान दिखाई ना दिया जहां से उसका मांस खाया जा सके अभी वह इस बात पर विचार कर ही रहा था कि कैसे हाथी की मोटी खाल को फाड़ा जाए तभी उसे एक शेर आता दिखाई दे गया शेर को देखते ही गीदड़ के छक्के


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August 2, 2020
गधे की मूर्खता

 गधे की मूर्खता


Spread the loveकिसी जंगल में एक शेर रहता था बूढ़ा हो जाने के कारण वह शिकार नहीं कर पाता था इसलिए उसका शरीर कमजोर होता जा रहा था वह अपनी कमजोरी दूसरे जानवरों के सामने प्रकट भी नहीं करना चाहता था नहीं तो दूसरे पशु उसके आदेशों की अवहेलना करने लगते कुछ विचार करने के बाद उसने सोचा कि किसी ऐसे पशु की मदद ली जाए जो किसी ना किसी पशु को बहका कर मेरे समीप ले आया करें मैं उस पशु को मार कर अपना पेट भर लिया करूंगा और थोड़ा बहुत उसके लिए भी छोड़ दिया करूंगा ऐसा


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August 1, 2020

मूर्ख राक्षस

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किसी नगर में भद्रसेन नाम का एक राजा राज किया करता था उसकी एक कन्या थी जो बेहद सुंदर और  गुणवंती एक दिन जब वह राजमहल के अपने कक्ष में सोई हुई थी तब एक राक्षस उसके कक्ष में आया उसने उस कन्या को देखा तो उस पर मोहित हो गया वह सोचने लगा यह कन्या तो अप्सराओं से भी ज्यादा सुंदर है क्यों ना इसका अपहरण कर अपने साथ ले   चलो

 ऐसा विचार कर राक्षस कन्या की और बड़ा लेकिन  सहसा उसके बढ़ते कदम  रुक गए राजकुमारी अपने तकिए के नीचे मंत्र सिद्धि का एक ऐसा ताबीज रखती थी जिसके प्रभाव से कोई भी बुरी बला उसके समीप नहीं फटक सकती थी उस रात राक्षस भी  विफल  होकर लौट गया लेकिन उसने निश्चय कर लिया था कि एक ना एक दिन वह इस सुंदर कन्या का अपहरण जरूर करेगा

 उस दिन से वह राक्षस रोज रोज अदृश्य रूप में राजकुमारी के कक्ष में पहुंचने लगा राजकुमारी को उसके आगमन की सूचना तो मिल जाती थी किंतु वह उससे देख नहीं पाती थी राक्षस के आते ही उसका शरीर कांपने लगता था और वह समझ जाती थी कि राक्षस उसके कमरे में आ पहुंचा है इस तरह अनेक दिन बीत गए राजकुमारी बड़े कष्ट का अनुभव करने लगी

एक दिन उसकी एक सहेली उसके पास आयी  राजकुमारी ने अपने मन की व्यथा उससे कहीं और बताया कि रात के अंधकार में एक राक्षस प्रतिदिन उसके कमरे में आता है और उसे परेशान करता है उस समय वह राक्षस भी अदृश्य रूप में राजकुमारी के कक्ष में मौजूद था उस मूर्ख ने यही समझा कि मेरी तरह कोई दूसरा राक्षस भी राजकुमारी पर मोहित है और उसका अपहरण करना चाहता है

किंतु  किन्ही कारणवश अभी तक विफल रहा है राक्षस ने मन ही मन विचार किया आज मैं सारी रात इसी कक्ष में मौजूद रहूंगा देखूंगा कि मेरा प्रतिद्वंदी वह दूसरा राक्षस कौन है जो इस राज्यकन्या को कष्ट पहुंचा रहा है लेकिन फिर उसके मन में यह विचार उभरा मैं इस कक्ष में ही खड़ा रहा तो मेरे प्रतिद्वंदी राक्षस को मेरी उपस्थिति का पता चल जाएगा ऐसा करता हूं कि राजा के अस्तबल में एक घोड़ा बनकर खड़ा हो जाता हूं राक्षस जब राजकुमारी का अपहरण करके ले जाना चाहेगा तो उसे किसी अच्छे घोड़े की आवश्यकता जरूर पड़ेगी तब मैं उससे निपट लूंगा ऐसा विचार कर वह राक्षस शाही अस्तबल में पहुंचा और शानदार घोड़े का रूप धारण कर अन्य घोड़ों के साथ चुपचाप खड़ा हो गया 

उसी रात घोड़ा चुराने की नियत से एक चोर सिपाहियों की नजर से बचकर राजा के गुडसाल में घुसा उसने वहां मौजूद सभी घोड़ों पर निगाह डाली फिर उसकी निगाह घोड़े बने राक्षस पर केंद्रित हो गई उसने घोड़े के मुंह में लगाम कसी और उछलकर उसकी पीठ पर सवार हो गया घोड़े को तेज दौड़ने के लिए उसने उसकी पीठ पर दो-चार जोरदार चाबुक मार दिए चाबुक लगते ही घोड़ा बना राक्षस एकदम सरपट दौड़ पड़ा उसने समझा 

यही दूसरा राक्षस है जिसने आदमी का वेश बनाया हुआ है घोड़ा बना राक्षस जान बचाने के लिए वायु के वेग  के समान भाग चला उसकी अप्रत्याशित चाल को देखकर उस पर सवार चोर वह भयभीत हो उठा उसने सोचा आज जान गई मेरी यह कोई सामान्य घोड़ा नहीं लगता जरूर घोड़े के बीच में कोई राक्षस या भूत प्रेत है

 तभी सामने उसने बरगद का एक विशाल पेट देखा जिसकी शाखाएं नीचे तक लटक रही थी चोर ने घोड़े का रुख उसी वृक्ष की ओर मोड़ दिया जैसे  ही पेड़ समीप आया चोर ने घोड़े की पीठ से उछलकर बरगद की एक मोटी शाखा पकड़ ली और ऊपर चढ़ गया

 उस बरगद के पेड़ पर एक बंदर रहता था जो राक्षस को पहचानता था घोड़ा बने राक्षस को उसने पहचान लिया बंदर ने जोर से उसे आवाज लगाई अरे ठहरो मित्र राक्षस कहां भागे जा रहे हो बोझ हल्का हुआ तो राक्षस ने भी कुछ राहत महसूस की बंदर की आवाज सुनकर वहां रुक गया उसने मुड़कर बंदर की दिशा में देखा और बोला एक बलवान राक्षस ने बहुत देर से मुझे दबोच रखा था बड़ी मुश्किल से उससे आजाद हुआ हूं क्या तुमने उस राक्षस को नहीं देखा

वह कोई राक्षस नहीं वह तो एक साधारण मानव है तुम्हारा भोजन है चाहो तो उसे खाकर अपनी भूख मिटा सकते हो बंदर ने कहा

ओह कहां है वह ? राक्षस ने पूछा अब उसका आत्मविश्वास  लौटने लगा था बंदर बोला इसी वृक्ष पर कहीं  पत्तों में  छुप गया है मैं अभी  उसकी खोज करता हूं

यह सुनकर चोर के छक्के छूट गए वह बंदर के ठीक नीचे पत्तों में छिपा एक मोटी डाल से चिपका हुआ था बंदर की पूंछ नीचे लटक रही थी चोर ने आव देखा ना ताव झट से बंदर की पूंछ पकड़ ली और उसे चबाने लगा बंदर जोर-जोर से चीखने लगा और अपनी पूंछ छुड़ाने की कोशिश करने लगा

राक्षस ने जब बंदर को चीखते चिल्लाते देखा तो वह अत्यधिक भयभीत हो उठा उसने समझा कि जरूर यहां मनुष्य राक्षस ही है इसने बंदर को दबोच लिया है और उसे हड़प कर जाना चाहता है राक्षस फिर वहां एक पल के लिए भी ना रुका वह आगे ही आगे भागता चला गया


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