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साधु और चूहा

साधु और चूहा


Spread the loveमध्यप्रदेश नामक शहर में शिवजी का एक मंदिर  था एक साधु उस मंदिर में रहता था वह शहर में जाकर भिक्षा मांग कर लाता और अपने परिवार का पेट पालता था प्रतिदिन जब वह खाना खा चुकता तब बचा हुआ खाना अपने भिक्षा पात्र में डालकर खूंटी पर लटका देता था फिर वह सोने चला जाता और सुबह वह बचा हुआ खाना सफाई करने वाले कर्मचारी को दे देता जो कि मंदिर का  बरामदा साफ करता था जहां वह सोता था  कुछ चूहे उस मंदिर में रहते थे वे उससे बहुत नाराज थे कि क्यों साधु अपना सारा


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August 12, 2020
dadi maa ki kahani

53 Dadi ma ki Khani


Spread the loveहेलो साथिओ स्वागत है आपका बचपन में हम सबने अपनी दादी नानी माँ से कहानियाँ तो सुनी ही होगी पर आज के दौर में dadi ma ki kahani जैसे लुप्त ही हो गयी है टेक्नोलॉजी के चलते आज के बचो के पास दादी से कहानियाँ सुनने का मौका ही नहीं लगता इसलिए हम आपके बच्चो के लिए लेके आये है 53 dadi ma ki kahani आशा करते है की आपको ये पसंद आएगी दादी माँ की कहानियो में जादू होता था तो चलिए आपको ले चलते हैु उसी पुराने दौर में जहा दादी अपने पौतो – पोती को


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August 5, 2020
दो दोस्त और बोल्नेवाला पेड

दो दोस्त और बोलनेवाला पेड


Spread the loveएक गांव में धर्मबुद्धि और पापबुद्धि नामक दो मित्र रहते थे धर्मबुद्धि बुद्धिमान और होशियार था पर उसका मित्र पापबुद्धि बुद्धि से कमजोर और धीमा काम करने वाला था पापबुद्धि गरीब था गरीबी में रहते – रहते वह तंग आ चुका था उसने सोचा यदि मैं अपने मित्र धर्मबुद्धि की सहायता लूं और उसके साथ किसी दूसरे शहर में जाकर धन कमाऊ तो अच्छा रहेगा बाद में मैं उसके हिस्से का धन चुरा लूंगा और फिर सारी जिंदगी आराम से रहूंगा थोड़े दिन पश्चात पापबुद्धि धर्मबुद्धि के पास गया और बोला तुमने अपनी वृद्धावस्था के लिए क्या सोचा


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August 3, 2020
शेर और चलाक गीदड़

शेर और चलाक गीदड़


Spread the loveएक बार घने जंगल में वज्रदंतसुर नामक  एक शेर रहता था उसके दो साथी थे एक चतुरका  नमक गीदड़ और दूसरा करवयामुख  नामक भेड़िया एक दिन व्यापारियों का एक दल ऊंटों पर सवार होकर उधर से निकला उनके साथ एक ऊंटनी थी जिसके बच्चे होने वाला था उससे चला नहीं जा रहा था इसलिए व्यापारियों का दल उसे वही जंगल में छोड़ कर आगे चला गया भूखे शेर ने तुरंत उसे मार डाला और मजे से उसका मांस खाने लगा साथ में उसके साथी भी मांस खाने लगे  लेकिन जब उन्होंने उसका पेट खोला तो उसमें एक छोटा


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August 3, 2020
धोखेबाज सुनार

धोखेबाज सुनार


Spread the loveपहले समय में किसी गांव में यज्ञदत्त नाम का एक गरीब ब्राह्मण रहता था वह बहुत सज्जन और दयालु व्यक्ति था किंतु उसकी पत्नी बहुत ही कटुभाषणी थी वह हर समय ब्राह्मण को कोसती और ताने मारती रहती थी इससे तंग आकर एक दिन यज्ञदत्त घर से निकल गया उसने निश्चय कर लिया कि अब वह धन कमाकर ही घर वापस लौटेगा यज्ञदत्त नगर की ओर चल दिया रास्ते में एक घना जंगल  पड़ता था जंगल से गुजरता हुआ यज्ञदत्त आगे ही आगे बढ़ता गया अब वह अपने गांव से काफी दूर निकल आया था उसने सोचा कि


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August 3, 2020
बंदर और मगरमच्छ 

बंदर और मगरमच्छ 


Spread the loveबहुत पहले की बात है किसी नदी के किनारे एक सेब के पेड़ पर एक बंदर रहता था वह रोज मीठे  – मीठे सेब तोड़ कर खाता रहता था एक दिन नदी में रहने वाले मगरमच्छ ने उसे सेब खाते हुए देखा तो उसका भी जी ललचा गया वह धीरे-धीरे चलकर बंदर के पास पहुंचा और बड़े ही मीठे शब्दों में बंदर से बोला बंदर भैया क्या तुम मुझे कुछ सेब दे सकते हो मुझे बहुत भूख लगी है बंदर ने तुरंत कुछ मीठे सेब तोड़ कर उसके लिए नीचे गिरा दिए मगरमच्छ ने बड़े स्वाद से उनको


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August 2, 2020
एक  ठग और सन्यासी 

एक  ठग और सन्यासी 


Spread the loveएक बार एक देवशर्मा नामक सन्यासी गांव से दूर एकांत स्थान पर किसी मंदिर में रहता था बहुत से लोग दूर-दराज से उसका आशीर्वाद पाने के लिए आते रहते थे वे उसे बहुत सुंदर वस्त्र भेंट स्वरूप दे जाते सन्यासी उन सब को बेच देता था इस प्रकार वह बहुत अमीर बन गया वह किसी का विश्वास नहीं करता था उसने सारा पैसा एक चमड़े के थैले में डाल रखा था जिसे वह हर समय अपनी बगल में दबाए रखता एक क्षण के लिए भी वह थैले को अपने से अलग ना करता अश्वभूति नामक एक चोर को


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August 2, 2020
 कौवे और उल्लू के बीच दुश्मनी

 कौवे और उल्लू के बीच दुश्मनी


Spread the loveएक बार दुनिया के सारे पक्षी इकठा हुए वे एक महत्वपूर्ण मंत्रणा करना चाहते थे तोता बत्तख कोयल उल्लू और बगुले और भी तरह – तरह के पक्षी इकठा हुए पक्षियों ने कहा गरुण हमारा राजा है पर वह सारा समय विष्णु भगवान की सेवा में लगा रहता है और हमारे लिए कुछ भी नहीं करता ऐसे राजा का क्या लाभ वह शिकारियों के बिछाए जाल से कभी हमारी रक्षा नहीं करता इसलिए हमें नए राजा का चुनाव समझदारी से करना चाहिए सब पक्षी अपनी नजर चारों ओर घुमा कर देखने लगे कि राजा किसे बनाए जाए उन्हें


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August 2, 2020
उल्लू और हंस

बुरे की संगत कभी ना करो


Spread the loveकिसी घने जंगल में एक बहुत बड़ा सरोवर था उस सरोवर में एक हंस रहता था जो बड़े आनंद के साथ अपना जीवन व्यतीत कर रहा था एक दिन कहीं से घूमता – घुमाता एक उल्लू वहां आ पहुंचा उसने पहले तो सरोवर से जल पिया  फिर अपनी दृष्टि इधर-उधर घुमाई उसे वह स्थान बहुत रमणीक लगा इसलिए उल्लू ने निश्चय किया कि अब वह इसी स्थान पर रहेगा उल्लू को वहां देख कर हंस उसके पास पहुंचा और बोला देख क्या रहे हो उल्लू भाई इस समय तो यह स्थान बहुत सुहाना दिख रहा है लेकिन गर्मी


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August 2, 2020
गीदड़ की चतुराई

गीदड़ की चतुराई


Spread the loveकिसी जंगल में महाचतुर नाम का एक गीदड़ रहता था एक दिन जब वह जंगल में अपने आहार की खोज में भटक रहा था तो उसने मरा हुआ एक हाथी देखा गीदड़ ने हाथी की लाश के चारों ओर घूमकर उसका निरीक्षण किया किंतु हाथी के शरीर में उसे कहीं भी ऐसा मुलायम स्थान दिखाई ना दिया जहां से उसका मांस खाया जा सके अभी वह इस बात पर विचार कर ही रहा था कि कैसे हाथी की मोटी खाल को फाड़ा जाए तभी उसे एक शेर आता दिखाई दे गया शेर को देखते ही गीदड़ के छक्के


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August 2, 2020

एकता का बल 

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किसी जंगल में कबूतरों का एक समूह रहता था उस समूह का मुखिया एक बुद्धिमान कबूतर था एक दिन जब कबूतरों का वह दल भोजन की तलाश में उड़ रहा था तो एक बरगद के पेड़ के नीचे कबूतरों ने चावल के दाने बिखरे हुए देखे बस फिर क्या था सारा दल नीचे उतरा आया और जल्दी-जल्दी चावलों को खाने लगा लेकिन कुछ ही देर बाद उन्हें पता चल गया कि वह तो एक बहेलिया के बिछाए जाल में फस चुके हैं कबूतरों ने पंख फड़फड़ा कर जाल से छूटने का बहुत प्रयास किया किंतु वे जाल से मुक्त ना हो सके

इतने सारे कबूतरों को जाल में फंसा देख पहेलियां खुश होकर जाल की और बड़ा तभी कबूतरों के दल के मुखिया ने कहा साथियों कुछ ही क्षण में बहेलिया यहां पहुंचने वाला है इससे पहले कि वह यहां पहुंचे सब एक साथ मिलकर जोर लगाओ और इस जाल को ही उड़ा ले चलो संगठन में बहुत शक्ति होती है सारे मिलकर प्रयास करोगे तो जाल को उड़ा ले चलना कोई मुश्किल कार्य नहीं होगा

सारे कबूतरों ने मिलकर जोर लगाया और जाल को लेकर ऊपर उड़ गए यह देखकर बहेलिया बदहवास हो उठा उसने जोर से अपना डंडा कबूतरों की और फेंका लेकिन तब तक कबूतर ऊंचे उड़ चुके थे बहेलिया पीछे-पीछे दौड़ा लेकिन जब कबूतर आगे ही आगे बढ़ते गए तो वह निराश होकर भूमि पर बैठ गया

उधर कबूतरों का मुखिया कबूतरों को ऐसे स्थान पर लेकर गया जहां उसका एक मित्र चूहा रहता था सारे कबूतर पंख फड़फड़ाते हुए उसके बिल के सामने उतरे तो वह भयभीत हो गया और भागकर अपने बिल में छुप गया कबूतरों के मुखिया ने जब उसे नाम लेकर पुकारा तो उसने धीरे से अपने बिल से बाहर झांका और पूछा अभी कौन मेरा नाम लेकर मुझे पुकार रहा था?

यहां मैं हूं तुम्हारा घनिष्ठ मित्र कबूतरों के मुखिया ने कहा

अपने मित्र को पहचान कर चूहा बाहर आया उन्हें इस हालत में देखकर वह बोला मित्र तुम तो इतने बुद्धिमान हो फिर इस जाल में कैसे फंस गए?

चावल खाने के लालच में हम फंस गए मित्र ! जो हो गया सो हो गया अब तुम अपने दांतो से इस जाल को काटकर हमें मुक्त कर दो कबूतर के मुखिया ने कहा

ठीक है मैं अभी तुम सब को मुक्त करता हूं लेकिन मैं सबसे पहले तुम्हें जाल से मुक्त करूंगा नहीं मित्र पहले मुझे नहीं मेरे दूसरे साथियों को मुक्त करो इन लोगों ने मुझ पर विश्वास करके ही मुझे इस दल का मुखिया बनाया है फिर मैं पहले मुक्त क्यों हो जाऊं तुम सबसे बाद में ही मुझे जाल से मुक्त करना दल के मुखिया ने कहा – चूहा अपने बुद्धिमान मित्र से ऐसी ज्ञान की बात सुनकर खुश हो उठा उसने अपने अपने दांत से जल्दी ही जाल काट डाला जाल कटते ही सभी कबूतर बंधन मुक्त हो गए दल का मुखिया अपने मित्र चूहे को धन्यवाद देकर अपने साथियों के साथ उड़ गया इसीलिए तो कहा गया है कि मिलकर कार्य करने से असंभव समझे जाने वाले कार्य भी सिद्ध हो जाते हैं हम सबको मिल-जुल कर ही कार्य करने चाहिए


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